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रविवार, 21 फ़रवरी 2010

वाकई लडकियां बहुत स्मार्ट होती हैं

राहुल गांधी पिछले दिनों जब बिहार के एक वुमेन्स कालेज में गये थे तो उनकी सहज सी टिप्पणी लडकियों के बारे में आयी थी। लडकियां बहुत स्मार्ट होती हैं। उनके कहने का मतलब साफ था लडकियां स्मार्ट तो दिखती ही हैं बेहद चालाक भी होती हैं। उनकी टिप्पणी अनायास नहीं थी। यह सच कि लडकियां बेहद स्मार्ट होती हैं वे कब कहां किसको उलझा दें नहीं कहा जा सकता है। चाहे वह उनके परिवार का कोइ सदस्य यहां तक पिता, भाई व पति ही क्यों न हो। बाराबंकी जिले के सियाराम रावत तो अब यही कहते हैं कि अगले जनम मोहे बिटिया न दीजो। बिटिया (लडकी) जिसे समाज मां, बहन, पत्नी व बेटी के साथ ही लक्ष्मी कहा जाता है ने अपने तुच्छ स्वार्थ के लिए अपने पिता पर ही शारीरिक शोषण का आरोप लगा डाला। सियाराम की दो बेटियों ने जब पुलिस के सामने उपस्थित होकर अपने पिता को खुद का बलात्कारी कहा तो पुलिस का उसके खिलाफ कार्रवाई करना लाजिमी था। पुलिस ने सियाराम को गिरपत्तार कर लिया लेकिन जब जांच में असली भेद खुला तो सबके पैरों तले जमीन खिसक गयी। वास्तव में सियाराम बलात्कारी नहीं था बल्कि उसने अपनी बेटियों की स्वच्छन्दता पर रोक लगाने की कोशिश की थी। अपने प्रेमियों के साथ खुलेआम गांव मोहल्ले में उनका घुमना सियाराम को पसन्द नहीं आया। तब उसकी दोनों बेटियों ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पिता पर ही बलात्कार का झूठा आरोप मढने की नापाक योजना बना डाली। जब तक भेद खुलता सियाराम कलयुगी पिता बन चुका था। लखनऊ में तीन वर्ष पूर्व भी पिता द्वारा अपनी बेटी के साथ वर्षों तक बलात्कार किये जाने की घटना प्रकाश में आयी थी। उसमें भी कितनी सत्यता रही होगी इस समय नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना तो साफ है कि लडकियां कब कहां किसको फंसा दें कहा नहीं जा सकता है। मेरे एक मित्र को इसी लखनऊ शहर की एक लडकी ने दोस्ती के नाम पर खूब एक्सप्लायट किया। जब उन्होंने मेरे से इस घटना का जिव्रᆬ किया तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मेरे एक परीचित जो दिल्ली में एक कम्पनी में आधकारी हैं की पत्नी ने शादी के एक साल के भीतर सात जन्मों के इस बन्धन को तोडने का ऐलान कर दिया। लडकी इसी लखनऊ शहर की है। पत्नी ने पहले उनकी पिटाई की बाद में उल्टे उन्हीं के खिलाफ दहेज उत्पीडन का मुकदमा भी दर्ज करा दिया। अब वे बेचारे पुलिस का चक्कर काट रहे हैं। मेरे कहने का यह कत्तई मतलब नहीं है कि सभी लडकियां इस तरह की ही होती हैं लेकिन समाज में ऐसे लोगों की संख्या लगातार बढ रही है जो ठीक नहीं है। लोगों को इस सामाजिक बुराई से जागरुक करने की जरुरत हैं। इसके साथ ही पुलिस को भी इस तरह की शिकायतों पर बगैर गहराई से जांच किये कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। बाराबंकी पुलिस ने यदि गहराई से पूरे मामले की जांच कर ली होती तो शायद ही सियाराम समाज के सामने अपनी ही बेटियों जिनकी वह भलाई चाहता था का बलात्कारी नहीं कहलाया होता।

3 टिप्‍पणियां:

  1. Deoki ji yeh aapka allegation girls cunning or clever hoti hain bilkul glat hai,aap society ke privilege society means media ke members hone ke saath apne un doston ko jbrn bcchne ki kosis kr rhe hain.

    Aapke woh dost ldkiyon ke dwara exploit tbhi hue honge jb unhone ldikiyon se illicit relation bnane or extra favour ki kosis ki hogi or woh pkke tor par west culture se effected hone ke saath mentally corrupt bhi honge.

    Hum aap jis society mein rhte hain or belong krte hain woh traditional country men ki hai.Or 2-4 ldikiyon ne undoston ka exploitation tbhi kiya jb unhone apni boarder line cross ki hogi.50 percent society ko bdnaam krna thik nhi jbki woh hmare society ka basic or strong base hain,Samjhe Deokiji good bye----Kr Ashok S Rajput

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  2. देवकी जी आपने बात तो सही लिखी है लेकिन इसको एक पक्ष की तरह ही देखा जा रहा है ऐसा लग रहा है ,ये भी तो हो सकता है कि लड़कियों की कोई दिक्कत रही हो, क्योंकि अगर सियाराम पर लगाये आरोप निराधार साबित हुए हैं तो आपकी बात में सच्चाई है, लेकिन क्या सियाराम ने स्वच्छंदता पर रोक लगाना सही है, क्या सिर्फ लड़कियों की स्वच्छंदता पर रोक लगाई जानी चाहिये, क्यों सियाराम जी उनकी शादियां ही करवा देते उन लड़को के साथ, हो सकता है किऐसी नौबत ही नहीं आती

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